ज़िंदगी की राह में…

ज़िंदगी की राह में कई हसीन सपने नज़र आते हैं,
लेकिन क्या वो सभी सपने हक़ीकत में बदल पाते हैं,
करना तो सब लोग अपनी ज़िंदगी में बहुत कुछ चाहते हैं,
पर क्या पूरी मेहनत से एक ईमानदार कोशिश दे पाते हैं,
बंद आँखों से सपने देखने का हक़ तो सभी को है दोस्तो,
लेकिन खुली आँखों से सपने देखने वेल ही उन्हे सच कर पाते हैं…

ज़िंदगी की राह में हर मोड़ पर शकुनी मिलते रहेंगे,
जब भी आगे जाना चाहोगे लोग पीछे मुड़ने को कहेंगे,
कुछ तो तुम्हे आगे मिलने वाले ख़तरों से डराएँगे,
पूरी कोशिश से तुम्हे वापस पीछे खीचना चाहेंगे,
लेकिन ज़िंदगी की ज़ंग में वही लोग आगे बढ़ सकते हैं,
जो इन लोगों की बातें ना सुनकर बस आगे ही चलते जाएँगे….

ज़िंदगी की राह में हर रोज़ कोई नया दुख मिलेगा,
मन बहुत परेशन होगा तुमसे हार मानने को भी कहेगा,
सुख तो केवल दूसरों के नसीब है हर पल ऐसा लगेगा,
सच कहता हूँ वही समय तुम्हारी परीक्षा का रहेगा,
लेकिन जो भी दुखो का पूरी हिम्मत से सामना करते हैं,
आख़िर में सुख उन्ही ही ज़िंदगी में खुशिया भरेगा….

ज़िंदगी की राह में कई नये रिश्ते बन जाते हैं,
उमरा के हर पड़ाव पर कुछ रिश्ते छोड़ते हैं तो कुछ अपनाते हैं,
अपने घर के रिश्ते हैं जो शायद ज़िंदगी भर साथ निभाते हैं,
लेकिन ये दोस्त ऐसे हैं जो अपने दिल में ही घर बनाते हैं,
कविराज की ज़िंदगी भी दोस्तो के बिना अधूरी है यारों,
क्यूंकी दोस्त ही मुसीबत में घरवालों से पहले खड़े नज़र आते हैं…..